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सुलो ने मुर्गी पालन को व्यवसाय के रूप में अपना कर की आर्थिक उन्नति

जगदलपुर 29 जून 2025/ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक माध्यम बना है।जगदलपुर विकासखंड के ग्राम बाबूसेमरा निवासी सुलो नाग ने एनआरएलएम बिहान के तहत मां वैष्णव देवी समूह से मुर्गी पालन से जुड़े है और देशी ब्रीड की 200 मुर्गी का पालन कर रहे है। सुलो ने मुर्गी पालन को व्यवसाय के रूप में अपना कर आर्थिक उन्नति की है। वे बताती है कि तीन महीने से मुर्गी को प्रति किलो 350 से 400 रुपए की दर से बेची है जिससे 65 हजार रु की आमदनी हुई है जिसमें से खर्चा काट के 35 हजार रुपए का शुद्ध मुनाफा कमाई है।
सुलो नाग ने अपनी कमाई की राशि से मुर्गी शेड, वैक्सीन और चारा की व्यवस्था भी किए है । सुलो नाग की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं भी अपने आजीविका को बेहतर बनाने के लिए नए अवसरों का लाभ उठा सकती हैं। सुलो ने अपने घर में पूर्व के मुर्गी और बतख पालन का अनुभव के आधार पर इस क्षेत्र में अपनी रुचि को बढ़ाया और स्व सहायता समूह के माध्यम से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर अपने कौशल को और बेहतर किया। सुलो ने कहा कि महिलाएं अपने घर में रहकर भी अपने आजीविका को बेहतर बना सकती हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार कर सम्मानजनक जीवन-यापन कर सकती हैं।

ज्ञात हो कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), जिसे अब दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के रूप में भी जाना जाता है, ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और आजीविका की चुनौतियों का समाधान करने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करना और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना है।
योजना का लक्ष्य:-ग्रामीण गरीबों को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित करके, उन्हें वित्तीय सेवाएं, आजीविका विविधीकरण और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच प्रदान करके सशक्त बनाना।यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाती है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता है। एनआरएलएम में स्वयं सहायता समूहों का गठन, बैंक लिंकेज, आजीविका संवर्धन, कौशल विकास, और उद्यमिता विकास जैसे विभिन्न घटक शामिल हैं।

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